बृहस्पतिवार (गुरुवार) की कथा के अनुसार, एक समय एक साहूकार था जिसके घर में धन-धान्य की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उसकी पत्नी बहुत कंजूस थी। एक बार, एक साधु भिक्षा मांगने आए, लेकिन उसने भिक्षा देने से इनकार कर दिया। साधु ने उसे बताया कि यदि वह सात बृहस्पतिवार तक कुछ विशेष काम करेगी तो उसके घर में दरिद्रता आ जाएगी। उसने वैसा ही किया और उसका घर बर्बाद हो गया।
फिर, राजा अपनी बहन को अपने साथ घर ले जाने आया, लेकिन उसकी बहन ने कहा कि वह बिना किसी बच्चे के नहीं जाएगी। राजा दुखी होकर वापस लौट आया और रानी को यह बात बताई। रानी ने बृहस्पतिदेव से संतान प्राप्ति की प्रार्थना की और उसी रात बृहस्पतिदेव ने स्वप्न में आकर उसे पुत्र होने का वरदान दिया।

एक अन्य कथा में, एक व्यापारी को चोरी के झूठे आरोप में जेल में डाल दिया गया। बृहस्पतिदेव ने उसे दर्शन देकर कहा कि बृहस्पतिवार को उसे चार पैसे मिलेंगे जिनसे वह व्रत करके अपने कष्टों से मुक्ति पा सकता है।एक अन्य प्रसंग में, एक स्त्री ने बृहस्पतिदेव का अनादर किया था, जिसके कारण उसका पुत्र घोड़ी से गिरकर मर गया। बृहस्पतिदेव ने उसे क्षमा करके कथा सुनने और प्रसाद ग्रहण करने को कहा, जिसके प्रभाव से उसका पुत्र जीवित हो गया।
अंततः, इन सभी कथाओं में बृहस्पतिदेव की महिमा का वर्णन है और यह बताया गया है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से बृहस्पतिवार का व्रत करता है और कथा सुनता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं
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